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एक अकेले आदमी ने सारी दुनिया की रूढ़ियों की बखिया उधेड़ दीः

वह जो दुनिया को हिला गया
(ओशो जन्मदिवस – 11 दिसंबर विशेष)

11 दिसंबर 1931, कुचवाड़ा (मध्य प्रदेश) में जन्मा वह बालक आगे चलकर बना *ओशो* – एक ऐसा नाम जो आज भी धर्मों के ठेकेदारों को नींद उड़ा देता है।

एक अकेले आदमी ने सारी दुनिया की रूढ़ियों की बखिया उधेड़ दीः  
- हिंदू पंडितों से कहा – “तुम्हारे वेद-पुराण मरे हुए हैं, ज़िंदा आदमी को मार रहे हो।” 
- जैन मुनियों से कहा – “नंगे रहने से कोई निर्लिप्त नहीं होता, भीतर की कामना देखो।”
- ईसाइयों से कहा – “जीसस को क्रॉस पर चढ़ाने वाले तुम ही हो, आज भी।” 
- बौद्ध भिक्षुओं से कहा – “तुम निर्वाण को भविष्य में टाल रहे हो, अभी जी लो।”  
सबके पास जवाब खत्म हो गए। सिर्फ़ गालियाँ बचीं।

फिर उसने अमेरिका को चुनौती दी।  
1981 में ओरेगॉन के बियाबान में बसाया *रजनीशपुरम* – 64 हज़ार एकड़ में एक हरा-भरा स्वप्न-नगर।  
तीन साल में वहाँ थींः  
- 94 रोल्स रॉयस कारें (दुनिया में सबसे ज़्यादा एक ही व्यक्ति के पास)  
- अपना हवाई अड्डा, अपना डाकघर, अपनी पुलिस, अपना बस नेटवर्क 
- 10 हज़ार से ज़्यादा संन्यासी दिन-रात ध्यान और उत्सव में डूबे हुए  

अमेरिका घबरा गया।  
सीआईए, एफबीआई, चर्च और सरकार – सबने मिलकर षड्यंत्र रचा।  
1985 में ओशो को ज़हर देकर गिरफ्तार किया गया।  
12 दिन तक बिना किसी आरोप के जेलों में घुमाया गया।  
अंत में बिना मुकदमा चलाए देश निकाला दे दिया।

फिर शुरू हुआ विश्व-युद्ध जैसा दौरः  
- 21 देशों ने ओशो को प्रवेश देने से साफ़ मना कर दिया 
- ग्रीस, जर्मनी, इटली, स्विट्ज़रलैंड, ब्रिटेन – सबने वीज़ा रद्द किया 
- भारत लौटने पर भी बम्बई एयरपोर्ट पर विमान को उतरने नहीं दिया गया  

पर वह हारा नहीं।  
1987 में पुणे लौटे तो पहले से दस गुना भीड़ थी।  
19 जनवरी 1989 को जब शरीर छोड़ा, तब तक दुनिया में उनके 700 से ज़्यादा पुस्तकें, सैकड़ों ध्यान-केंद्र और लाखों जागे हुए लोग छोड़ गए थे।

आज भी पूछो तो कोई कहता है – “वह ख़तरनाक़ था।”  
और कोई रोते हुए कहता है – “वह इस सदी का सबसे सुंदर हादसा था।”

11 दिसंबर कोई तारीख़ नहीं है।  
यह याद है कि इस पृथ्वी पर कभी एक व्यक्ति आया था  
जिसने सारी दुनिया को बता दिया –  
“तुम जितने बड़े हो, उतने छोटे भी हो। 
और मैं जितना छोटा हूँ, उतना ही असीम हूँ।”

उसका नाम था – *ओशो*  
उसका संदेश था – *जीयो पूरी तरह, जागो पूरी तरह*

पत्रकार लव कुमार